Swahit aur parhit wale-स्वहित और परहित वाले कार्य

हम नीति, राजनीति, कूटनीति, कुटिल नीति, धर्म नीति किसी भी नीति की बात करें, भगवान कृष्ण की लीलाएं , श्रीराम भगवान का आदर्श हमारा पथ प्रदर्शन करेंगी। आवश्यकता है कि हम
परहित( दुसरो के लिए ) हेतु कार्य करें। स्वहित(खुद के लिए ) में किया गया कार्य अंत में अपना ही अहित करता है, और परहित में किया गया कार्य अंत में स्वहितकारी बन जाता है। हम सदैव समाज व राष्ट्र हित के लिए समर्पण भाव से काम करें।


जय जय श्रीराम
जय जय श्रीराधे

Aise hamare kisan kanhaiyaa-ऐसे हमारे किसन कन्हैया

आईये सुनते हैं कृष्ण की लीला, देवकी-यशोदा जिनकी मैया, वैसे तो कृष्ण को लोगो ने माखन चोर नन्द किशोर का नाम दिया है , क्यों कि वे बहुत नटखट थे , अपने मित्रो के साथ माखन चुरा कर खा जाते थे , यशोदा मैय्या के पूछने पर कृष्ण बोलते – मैया मैं नहीं माखन खायो …

माखन चोर नन्द किशोर , बांधी जिसने प्रीत की डोर , हरे कृष्ण हरे मुरारी, पूजती जिन्हें दुनिया सारी, आओ उनके गुण गाएं सब मिल के जन्माष्टमी मनाये. गोकुल में जो करे निवास, गोपियों संग जो रचाये रास, देवकी-यशोदा जिनकी मैया, ऐसे हमारे किसन कन्हैया।