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कोरोना शायरी- in अमिताभ style (बाई)

&NewLine;<p>मैं और मेरी तन्हाई अक्सर ये बातें करते है …<br>बाई होती तो ऐसा होता&comma; बाई होती तो कैसा होता…<br>वो कपड़े धोती और मैं सोतीं…<br>वो खाना पकाती और मैं पेट भर खाती…<br>वो पोंछा मारती और मैं FB&sol;WA पर चैटिंग करती …<br>मैं और मेरी तन्हाई अक्सर ये बातें करते है…<br>बाई होती तो ऐसा होता&comma; बाई होती तो वैसा होता…&quest;&quest;&quest;&quest;&quest;&quest;&quest;&quest;&quest;&quest;&quest;&quest;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>मजबूर ये हालात इधर भी है और उधर भी…<br>तन्हाई की एक रात इधर भी है और उधर भी…<br>करने को इतना कुछ है मगर क्या क्या करे हम…<br>कब तक यूँही काम करे और सहे हम…<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>दिल कहता है&comma; दुनिया की हर एक रस्म भुला दे…<br>ये जो दीवार CORONA की है उसे गिरा दे…<br>क्यूँ अकेले सुलगते रहे हम&comma; बाई को बुला ले…<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>हाँ हम थक गए है&comma; थक गए है&comma; थक गए है …<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>अब दिल में ये बात इधर भी है और उधर भी। &quest;&quest;&quest;&quest;&quest;&quest;&quest;&quest;&quest;&quest;&quest;&quest;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;