Daaru ki janm gaatha- दारु की जन्म गाथा

<p>&&num;8220&semi;दारु की जन्म गाथा&&num;8221&semi;<&sol;p>&NewLine;<p>दुनिया में पहली बार दारू बनाने की भट्ठी एक बरगद के पेड़ के नीचे लगी थी &vert;<&sol;p>&NewLine;<p>पेड़ पर एक कोयल और एक तोता रहते थे &vert;<br &sol;>&NewLine;पेड़ के नीचे एक शेर और एक सूअर अक्सर आराम करने आते थे &vert; <&sol;p>&NewLine;<p>पहले ही दिन दारू बनाते समय भट्ठी से आग लग गयी &vert; <&sol;p>&NewLine;<p>आग में कोयल&comma; तोता&comma; शेर और सूअर जल कर मर गए।<&sol;p>&NewLine;<p>और चारों की आत्मा सदा के लिए दारू में प्रवेश कर गयी &vert;<br &sol;>&NewLine;अब नतीजा ये हुआ कि&comma;&comma;<br &sol;>&NewLine;&&num;8211&semi;<br &sol;>&NewLine;&&num;8211&semi;<br &sol;>&NewLine;दो पैग के बाद कोयल की आत्मा का असर और मीठे बोल चालू &vert;<&sol;p>&NewLine;<p>तीसरे पैग के बाद तोते की तरह एक ही बात की टें टें टें &vert;<&sol;p>&NewLine;<p>चौथे पैग के बाद शेर की आत्मा का असर और फिर मुहल्ले का दादा बन गए &vert; <&sol;p>&NewLine;<p>और अगले पैग के बाद सूअर की आत्मा जग जाती है<br &sol;>&NewLine;और फिर तो आप जानते ही होंगे<br &sol;>&NewLine;&lowbar;<br &sol;>&NewLine;&lowbar;<br &sol;>&NewLine;&lowbar;<&sol;p>&NewLine;<p>नाली मे &&num;8230&semi;&&num;8230&semi;&&num;8230&semi;&&num;8230&semi;&period; &semi;&rpar;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;