Swahit aur parhit wale-स्वहित और परहित वाले कार्य

&NewLine;<p>हम नीति&comma; राजनीति&comma; कूटनीति&comma; कुटिल नीति&comma; धर्म नीति किसी भी नीति की बात करें&comma; भगवान कृष्ण की लीलाएं &comma; श्रीराम भगवान का आदर्श हमारा पथ प्रदर्शन करेंगी। आवश्यकता है कि हम <br>परहित&lpar; दुसरो के लिए &rpar; हेतु कार्य करें। स्वहित&lpar;खुद के लिए &rpar; में किया गया कार्य अंत में अपना ही अहित करता है&comma; और परहित में किया गया कार्य अंत में स्वहितकारी बन जाता है। हम सदैव समाज व राष्ट्र हित के लिए समर्पण भाव से काम करें।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><br>जय जय श्रीराम <br>जय जय श्रीराधे <&sol;p>&NewLine;&NewLine;