Raakhi spacial kavita for all -राखी स्पेशल कविता सबके लिए।

​किसी बहन ने अपने भाई के लिए बहोत ही अच्छा पोस्ट लिखा है….उस बहन को मेरा प्रणाम 
इस राखी पर भैया ,मुझे बस

यही तोहफा देना तुम ,

रखोगे ख्याल माँ-पापा का , बस यही इक

वचन देना तुम ,

बेटी हूं मैं , शायद ससुराल से रोज़ न आ

पाऊंगी ,

जब भी पीहर आऊंगी , इक मेहमान बनकर

आऊंगी ,

पर वादा है, ससुराल में संस्कारों से,

पीहर की शोभा बढाऊंगी ,

तुम तो बेटे हो , इस बात को न

भुला देना तुम ,

रखोगे ख्याल माँ -पापा का बस यही वचन

देना तुम ,

मुझे नहीं चाहिये सोना-चांदी , न चाहिये

हीरे-मोती ,

मैं इन सब चीजों से कहां सुःख पाऊंगी

देखूंगी जब माँ-पापा को पीहर में खुश

तो ससुराल में चैन से मैं भी जी पाऊंगी

अनमोल हैं ये रिश्ते , इन्हें यूं ही न

गंवा देना तुम ,

रखोगे ख्याल माँ-पापा का , बस

यही वचन देना तुम ,

वो कभी तुम पर यां भाभी पर

गुस्सा हो जायेंगे ,

कभी चिड़चिड़ाहट में कुछ कह भी जायेंगे ,

न गुस्सा करना , न पलट के कुछ कहना तुम ,

उम्र का तकाजा है, यह

भाभी को भी समझा देना तुम ,

इस राखी पर भैया मुझे बस

यही तोहफा देना तुम ,

रखोगे ख्याल माँ-पापा का , बस

यही वचन देना तुम ।