Birthday wishes for Son – किसी की दुआ

🎂 जन्मदिन की शायरी 🌸

आज के दिन सिर्फ तारीख नहीं बदली है,
आज वो लम्हा लौटा है, जिसने हमारी ज़िंदगी बदल दी थी।
तुम आए तो हर ख़ामोशी को आवाज़ मिली,
हर अधूरी दुआ को पूरा होने का एहसास मिला।

वक़्त के साथ तुम बड़े होते गए,
और हम हर दिन तुम्हारे होने पर शुक्रगुज़ार होते गए।
तुम्हारी हँसी में सुकून है,
तुम्हारी बातों में ज़िंदगी की मिठास है।

दुनिया तुम्हें जितना भी परखे,
याद रखना — तुम्हारे पीछे किसी की दुआ हमेशा खड़ी है।
हर मुश्किल राह में हौसला बनकर,
हर अंधेरे में उजाला बनकर।

आज तुम्हारे जन्मदिन पर बस यही चाह है,
तुम्हारा हर सपना सच हो,
हर हार जीत में बदले,
और तुम्हारा दिल कभी टूटे नहीं।

ज़िंदगी तुम्हें जितना भी आगे ले जाए,
तुम इंसानियत, सच्चाई और प्यार को कभी मत छोड़ना।
क्योंकि यही वो दौलत है,
जो तुम्हें हर जीत से बड़ा बनाएगी।

जन्मदिन मुबारक हो।
तुम हो तो हर दिन खास है,
और आज का दिन तो दिल से भी ज़्यादा खास है। 💖

 

Jaan jaye par phone na jaye- जान जाये पर फ़ोन न जाये

एक औरत हाथ में i phone 6 लेकर रास्ते से चल रही थी….

की पैर फिसला और गिर पडी.. तभी कुछ खटाक से टूटने की आवाज़ आई !!

दिल थाम कर वो बोली..

“भगवान् करे हड्डी हो..
ओह हो

Ek Sheeth ji they jinke paas kaafi-एक सेठ जी थे जिनके पास काफी

एक सेठ जी थे –
जिनके पास काफी दौलत थी.
सेठ जी ने अपनी बेटी की शादी एक बड़े घर में की थी.
परन्तु बेटी के भाग्य में सुख न होने के कारण उसका पति जुआरी, शराबी निकल गया.
जिससे सब धन समाप्त हो गया.
बेटी की यह हालत देखकर सेठानी जी रोज सेठ जी से कहती कि आप दुनिया की मदद करते हो,
मगर अपनी बेटी परेशानी में होते हुए उसकी मदद क्यों नहीं करते हो?
सेठ जी कहते कि
“जब उनका भाग्य उदय होगा तो अपने आप सब मदद करने को तैयार हो जायेंगे…”
एक दिन सेठ जी घर से बाहर गये थे कि, तभी उनका दामाद घर आ गया.
सास ने दामाद का आदर-सत्कार किया और बेटी की मदद करने का विचार उसके मन में आया कि क्यों न मोतीचूर के लड्डूओं में अर्शफिया रख दी जाये…
यह सोचकर सास ने लड्डूओ के बीच में अर्शफिया दबा कर रख दी और दामाद को टीका लगा कर विदा करते समय पांच किलों शुद्ध देशी घी के लड्डू, जिनमे अर्शफिया थी, दिये…
दामाद लड्डू लेकर घर से चला,
दामाद ने सोचा कि इतना वजन कौन लेकर जाये क्यों न यहीं मिठाई की दुकान पर बेच दिये जायें और दामाद ने वह लड्डुयों का पैकेट मिठाई वाले को बेच दिया और पैसे जेब में डालकर चला गया.
उधर सेठ जी बाहर से आये तो उन्होंने सोचा घर के लिये मिठाई की दुकान से मोतीचूर के लड्डू लेता चलू और सेठ जी ने दुकानदार से लड्डू मांगे…मिठाई वाले ने वही लड्डू का पैकेट सेठ जी को वापिस बेच दिया.
सेठ जी लड्डू लेकर घर आये.. सेठानी ने जब लड्डूओ का वही पैकेट देखा तो सेठानी ने लड्डू फोडकर देखे, अर्शफिया देख कर अपना माथा पीट लिया.
सेठानी ने सेठ जी को दामाद के आने से लेकर जाने तक और लड्डुओं में अर्शफिया छिपाने की बात कह डाली…
सेठ जी बोले कि भाग्यवान मैंनें पहले ही समझाया था कि अभी उनका भाग्य नहीं जागा…
देखा मोहरें ना तो दामाद के भाग्य में थी और न ही मिठाई वाले के भाग्य में…
इसलिये कहते हैं कि भाग्य से
ज्यादा
और…
समय
से पहले न किसी को कुछ मिला है और न मीलेगा!
ईसी लिये ईशवर जितना दे उसी मै संतोष करो..

Ladki- tum kya kaam karte ho – लड़की – तुम क्या काम करते हो

लड़की – तुम क्या काम करते हो
लड़का– Hindustan Times में job करता था.
लड़की. छोड़ क्यूँ दिया कितनी अच्छी कंपनी तो है
लड़का-.अब इतनी ठंड में कौन सुबह-सुबह अखबार बाटने जाये.

Niyat aur dikhawa ek vyakti -नियत और दिखावा एक व्यक्ति

नियत और दिखावा
एक व्यक्ति मंदिर जा रहा था अपने 5 साल के पुत्र के साथ….आरती का समय हो गया था….उस व्यक्ति ने देखा कि मैं जब आरती गा रहा हूँ तो मेरा पुत्र भी कुछ गुनगुना रहा है…
बाहर आकर उसने पुत्र से पूछा कि तुम्हें तो आरती आती नहीं ….तुम क्या गा रहे थे?
पुत्र ने बहुत सुंदर जवाब दिया…
” मैने तो क ख ग घ पूरा सुना दिया भगवान जी को और कहा कि इन शब्दों से अपने आप प्रार्थना बना लो..”

दुनिया दिखावा देखती है नीयत नहीं
भगवान नीयत देखते हैं दिखावा नहीं”

!!जयश्री कृष्णा!!

Ek lakadhara jangal me ladki – एक लकडहारा जंगल मे लडकी

एक लकडहारा जंगल मे लडकी काट रहा था
कि
तभी
तभी
वहाँ CID आई और उसको पकड लिया

आप सोच रहे होंगे कि उस लकडहारे को क्यों पकड लिया ???

तो भाई , सावन के अंधे तो हो नहीं , फिर भी , ” लड़की ” को लकड़ी पढ़ रहे हो ??
जरा ऊपर जाकर ठीक से पढ़िए क्या लिखा है ?

अब खुद ही हँसते रहोगे या आगे भी हसाओगे…

Bete aur beti ke upar kahawat- बेटे और बेटी के ऊपर कहावत

बोये जाते हैं बेटे..
पर उग जाती हैं
बेटियाँ..

खाद पानी बेटों को..
पर लहराती हैं बेटियां.

स्कूल जाते हैं बेटे..
पर पढ़ जाती हैं
बेटियां..

मेहनत करते हैं बेटे..
पर अव्वल आती हैं
बेटियां..

रुलाते हैं जब खूब बेटे.
तब हंसाती हैं बेटियां.

नाम करें न करें बेटे..
पर नाम कमाती हैं
बेटियां..

जब दर्द देते हैं बेटे…
तब मरहम लगाती
हैं बेटियां..

छोड़ जाते हैं जब बेटे..
तो काम आती हैं
बेटियां..

आशा रहती है बेटों से.
पर पूर्ण करती हैं
बेटियां..

हजारों फरमाइश से
भरे हैं बेटे….
पर समय की नज़ाकत
को समझती बेटियां..
बेटी को चांद जैसा
मत बनाओ कि हर
कोई घूर घूर कर देखे..

लेकिन
———————–
बेटी को सूरज जैसा
बनाओ ताकि घूरने से
पहले सब की नजर झुक
जाये..
बेटे और बेटी के ऊपर कहावत

Sharaab Daaru pine ka kudrati asar- दारू का कुदरती असर

दारू का कुदरती असर

एक पैग के बाद : सत्य वक्ता,

दो पैग के बाद : अँग्रेजी वक्ता,

तीन के बाद : अधिवक्ता,

चार के बाद : उपदेशक,

पाँच के बाद : शायर,

छः के बाद : शेर,

सात के बाद : ढेर,