आज काम वाली नही आई
वो फ़र्श की धूल पे पड़े
चंद पैरों के निशान…
वो चाय के दो सूखे कप ..
वो ख़ामोश दाल के सूखे बर्तन …
वो सूखी पड़ी चाय की पत्ती से भरी बेजान छन्नी…….
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इसका अर्थ है कि…..
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आज
कामवाली नहीं आई
हर समय गुलज़ार साहब ही नहीं आते