घुसपैठिया भगाओ छग बचाओ एक नारा
तुम घुसपैठिया भिखमंगे हो, मैं छत्तीसगढ़िया मुक्तियार प्रिये।।
तुम कटोरा लेकर आते हो,मैं कोठी भर भर धान प्रिये।।
तुम औलादें अपराधी का, मैं भोला भाला शांत प्रिये।।
तेरी दृष्टि है मेरी सृष्टि पर,इसका है मुझको भान प्रिये।।
तुम खोखला करते दीमक हो, मैं छत्तीसगढ़िया अनजान प्रिये।।
तुम काला डोमी हत्यारा मैं दाता अमृत जान प्रिये।।
छत्तीसगढ़िया अब जाग चुका है,ज्ञान हुआ है आन का।
घुसपैठिया बिल में वापस जा,अंत है तेरी झूठी शान का।।
“जो भरा नहीं है भावों से बहती जिसमें रसधार नहीं, वह हृदय नहीं है, पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।”
जय छत्तीसगढ़।।
जय छत्तीसगढ़िया।।