Ek mendhak pede ki choti-एक मेढक पेड़ की चोटी पर चढ़न

एक मेढक पेड़ की चोटी पर चढ़ने का सोचता है और आगे बढ़ता है

बाकी के सारे मेंढक शोर मचाने लगते हैं “ये असंभव है.. आज तक कोई नहीं चढ़ा.. ये असंभव है.. नहीं चढ़ पाओगे”

मगर मेंढक आख़िर पेड़ की चोटी पर पहुँच ही जाता है.. जानते हैं क्यूँ?

क्योंकि वो मेंढक “बहरा” होता है.. और सारे मेंढकों को चिल्लाते देख सोचता है कि सारे उसका उत्साह बढ़ा रहे हैं

इसलिए अगर आपको अपने लक्ष्य पर पहुंचना है तो नकारात्मक लोगों के प्रति “बहरे” हो जाइए ।

Shabd sambhale boliye- शब्द संभाले बोलिए

“शब्द संभाले बोलिए, शब्द के हाथ न पावं!
“एक शब्द करे औषधि, एक शब्द करे घाव!

“शब्द सम्भाले बोलियेे, शब्द खीँचते ध्यान!
“शब्द मन घायल करेँ, शब्द बढाते मान!

“शब्द मुँह से छूट गया, शब्द न वापस आय..
“शब्द जो हो प्यार भरा, शब्द ही मन मेँ समाएँ!

“शब्द मेँ है भाव रंग का, शब्द है मान महान!
“शब्द जीवन रुप है, शब्द ही दुनिया जहान!

“शब्द ही कटुता रोप देँ, शब्द ही बैर हटाएं!
“शब्द जोङ देँ टूटे मन, शब्द ही प्यार बढाएं.