जीवन में पढ़ाई के महत्व को नहीं भूलना…
एक समय की बात है एक राजा था उसे पशु पक्षियों से बहुत प्यार था पशु पक्षियों से मिलने के लिए हमेशा मन में जाता था हमेशा की तरह एक दिन राजा पशु पक्षियों को देखने के लिए वन में गया अचानक आसमान में बादल छा गए और तेज तेज बारिश होने लगी बारिश के कारण उसे ठीक से रास्ता दिखाई नहीं दे रहा था और वह रास्ता भटक गया रास्ता ढूंढते–ढूंढते किसी तरह राजा जंगल के किनारे पहुंचे गया भूख और प्यास तथा थकान से परेशान राजा एक बड़े पेड़ के नीचे बैठ गया।
तभी राजा को उधर से तीन बालक आते हुए दिखाई दिए राजा ने उन्हें प्यार से बुलाया बच्चों यहां आओ और मेरी बात सुनो ।
तीनों बालक हंसते खेलते राजा के पास आ गए तब राजा बोले मुझे बहुत भूख और प्यास लगी है क्या मुझे भोजन और पानी मिल सकता है बालक बोले पास में ही हमारा घर है हम अभी जाकर आपके लिए भोजन और पानी लेकर आते हैं आप बस थोड़ा सा इंतजार कीजिए।
तीनों बालक दौड़ कर गए और राजा के लिए भोजन और पानी लेकर आए राजा बालकों के व्यवहार से बहुत खुश हुआ वह बोले प्यारे बच्चो तुमने मेरी भूख और प्यास मिटाई है मैं तुम तीनों बालकों को इनाम के रूप में कुछ देना चाहता हूं । बताओ तुम्हें क्या चाहिए थोड़ी देर सोचने के बाद एक बालक बोला महाराज क्या आप मुझे एक बड़ा सा बंगला और गाड़ी दे सकते हैं राजा बोले हां हां क्यों नहीं अगर तुम्हें यही चाहिए तो जरुर मिलेगा ।
अब तो बालक फूले नहीं समाया दूसरा बालक भी उछलते हुए बोला मैं बहुत गरीब हूं मुझे धन चाहिए जिससे मैं भी अच्छा अच्छा अच्छा भी सकूं अच्छे कपड़े पहन सकूं और खूब मस्ती करो राजा मुस्कुरा कर बोले ठीक है बेटा मैं तुम्हें बहुत सारा धन दूंगा यह सुनकर दूसरा बालक खुशी से झूम उठा वाला तीसरा वाला क्यों चुप रहता ।
वह भी बोला महाराज क्या आप मेरा सपना भी पूरा करेंगे मुस्कुराते हुए राजा ने कहा क्यों नहीं बोलो बेटा तुम्हारा क्या सपना है तुम्हें भी धन दौलत चाहिए उसने कहा नहीं महाराज मुझे धन दौलत नहीं चाहिए मेरा सपना है कि मैं पढ़ लिखकर विद्वान बनना चाहता हूं क्या आप मेरे लिए कुछ कर सकते हैं तीसरे वाले की बात सुनकर राजा बहुत खुश हुआ राजा मैं उसके पढ़ने लिखने की उचित व्यवस्था करवा दी वह मेहनती बालक था ।
दिन रात पढ़ाई लगन से करता था और कक्षा में पहला स्थान प्राप्त इस प्रकार समय बीतता गया वक्त पढ़ लिखकर विद्वान बन गया राजा ने उसे राज्य का मंत्री बना दिया बुद्धिमान होने के कारण सभी लोग उसका आदर सम्मान करने लगे उधर जिस बालक ने राजा से बंगला और गाड़ी मांगी थी अचानक बाढ़ आने से उसका सब कुछ पानी में बह गया दूसरा बालक वेतन मिलने के बाद कोई काम नहीं करता था।
बस दिन भर फिजूलखर्ची करके धन को उड़ा था और मौज मस्ती करता था अतः रखा हुआ धन ओला कब तक चलता है एक समय आया कि उसका सारा धन समाप्त हो गया वह फिर से करीब हो गया दोनों बालक उदास होकर अपने मित्र यानी मंत्री से मिलने राजा के दरबार में गए वह दुखी होकर अपने मित्र से पहले हम ने राजा से नाम मांगने में बहुत बड़ी भूल कि हमारा धन बंगला गाड़ी सब कुछ नष्ट हो गया हमारे पास अब कुछ नहीं बचा।
मित्र ने समझाते हुए कहा किसी के भी पास धन दौलत हमेशा नहीं रहता धन तो आता जाता रहता है सिर्फ शिक्षा है जो हमारे पास रहती है ढंग से नहीं बल्कि शिक्षा से ही हम धनवान बनते हैं दोनों बालकों को अपनी गलती पर बहुत पछतावा हुआ उन्होंने क्या किया कि हम भी मेहनत और लगन से पढ़ाई करेंगे और अपने जीवन को सुखी बनाएंगे ।
हमें अपने जीवन में पढ़ाई के महत्व को नहीं भूलना चाहिए क्योंकि शिक्षा अगर आपके जीवन में है तो धन की कमी आपको कभी नहीं होगी किंतु अगर आप उनके पीछे भागेंगे तो निश्चित रुप से आपको जीवन में धन और शिक्षा दोनों का अभाव झेलना पड़ेगा..!!