Waqt ki ek aadat bahut वक्त की एक आदत बहुत
???? वक्त की एक आदत बहुत
अच्छी है,
जैसा भी हो, गुजर जाता है!
“कामयाब इंसान खुश
रहे ना रहे,
खुश रहने वाला इंसान कामयाब
जरूर हो जाता है|
???? वक्त की एक आदत बहुत
अच्छी है,
जैसा भी हो, गुजर जाता है!
“कामयाब इंसान खुश
रहे ना रहे,
खुश रहने वाला इंसान कामयाब
जरूर हो जाता है|
सेठ(नोकर से)- जरा देखना तो कितना टाइम हो रहा है…?
नौकर – मुझे टाइम देखना नही आता…
सेठ – अच्छा कोई बात नही…
यह देखकर बताओ कि बड़ी सूई कहा है और छोटी सूई कहाँ है?
नौकर – दोनो सूइयां घड़ी में हैं…
kya khoob likha hai kisine
प्यास लगी थी गजब की…
मगर पानी मे जहर था…
पीते तो मर जाते और ना पीते तो भी मर जाते.
बस यही दो मसले, जिंदगीभर ना हल हुए!!!
ना नींद पूरी हुई, ना ख्वाब मुकम्मल हुए!!!
वक़्त ने कहा…..काश थोड़ा और सब्र होता!!!
सब्र ने कहा….काश थोड़ा और वक़्त होता!!!
सुबह सुबह उठना पड़ता है कमाने के लिए साहेब…।।
आराम कमाने निकलता हूँ आराम छोड़कर।।
“हुनर” सड़कों पर तमाशा करता है और “किस्मत” महलों में राज करती है!!
“शिकायते तो बहुत है तुझसे ऐ जिन्दगी,
पर चुप इसलिये हु कि, जो दिया तूने,
वो भी बहुतो को नसीब नहीं होता”..
अजीब सौदागर है ये वक़्त भी!!!!
जवानी का लालच दे के बचपन ले गया….
अब अमीरी का लालच दे के जवानी ले जाएगा. ……
लौट आता हूँ वापस घर की तरफ… हर रोज़ थका-हारा,
आज तक समझ नहीं आया की जीने के लिए काम करता हूँ या काम करने के लिए जीता हूँ।
“थक गया हूँ तेरी नौकरी से ऐ जिन्दगी
मुनासिब होगा मेरा हिसाब कर दे…!!”
भरी जेब ने ‘ दुनिया ‘ की पहेचान करवाई और खाली जेब ने ‘ अपनो ‘ की.
जब लगे पैसा कमाने, तो समझ आया,
शौक तो मां-बाप के पैसों से पुरे होते थे,
अपने पैसों से तो सिर्फ जरूरतें पुरी होती है। …!!!
हंसने की इच्छा ना हो…
तो भी हसना पड़ता है…
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कोई जब पूछे कैसे हो…??
तो मजे में हूँ कहना पड़ता है…
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ये ज़िन्दगी का रंगमंच है दोस्तों….
यहाँ हर एक को नाटक करना पड़ता है.
“माचिस की ज़रूरत यहाँ नहीं पड़ती…
यहाँ आदमी आदमी से जलता है…!!”
दुनिया के बड़े से बड़े साइंटिस्ट,
ये ढूँढ रहे है की मंगल ग्रह पर जीवन है या नहीं,
पर आदमी ये नहीं ढूँढ रहा
कि जीवन में मंगल है या नहीं।
मास्टर जी एक होटल में ख़ाली कटोरी में रोटी डुबो-डुबो कर खा रहे थे।
वेटर ने पूछा:
मास्टरजी ख़ाली कटोरी में कैसे खा रहे हैं?
मास्टर जी:
भइया, हम गणित के अध्यापक हैं।
दाल हमने ‘मान ली’ है।
गांव का छोरा सुल्तान देखने के बाद अपनी गर्लफ्रेंड के लिए ..
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आजकल सिर्फ यही गाना गाता रहता है –
*बेबी को भैंस ???? पसंद है*
घर जमाई: आज से मैं रोटी
नहीं, चावल ही
खाऊंगा।
सास: क्यो?
घर जमाई: मोहल्ले वालों के तानो से थक
गया
हूँ कि मैं ससुराल में मुफ़्त की
रोटी तोड़ता हूँ|
नया Whatsapp आरती
भीगी भीगी सडको पे में
“NET” का इंतेजार करू
धीरे धीरे “MOBILE” को
“INTERNET” के ही नाम करू
खुद को मै यु खो दू,
के “GOOGLE” पे भी ना मिलु
होले होले जिंदगी को
अब “WHATSAPP” के हवाले करू
Whatsapp रे
Whatsapp रे
तू मेरा सनम हुआ रे ..
जो लड़किया अर्धनंग्न कपड़े पहनती है उनकेलिये एक पिता की ओर से समर्पित:-
एक लड़की को उसके पिता ने iphone गिफ्टकिया..
दूसरे दिन उसको पुछा iphone मिलने के बादसबसे पहले तुमने क्या किया?
लड़की – मैंने स्क्रेच गार्ड और कवर काआर्डर दिया…
पिता – तुम्हें ऐसा करने के लिये किसी ने बाध्यकिया क्या?
लड़की – नहीं किसी ने नहीं।
पिता – तुम्हें ऐसा नही लगता कि तुमने iPhoneनिर्माता की तौहिन की हैं?
बेटी- नहीं बल्कि निर्माता ने स्वयं कवर वस्क्रेच गार्ड लगाने के लिये सलाह दी है…
पिता – अच्छा तब तो iphone खुद ही दिखने मेखराब दिखता होगा तभी तुमने उसके लिये कवरमंगवाया है?
लड़की – नहीं…. बल्कि वो खराब ना हो ईसलिये
कवर मंगवाया है…..
पिता – कवर लगाने से उसकी सुन्दरता में कमी आई क्या?
लड़की – नहीं … इसके विपरीत कवर लगाने केबाद iPhone ज्यादा सुन्दर दिखता है…
पिता ने बेटी की ओर स्नेह से देखते कहा….बेटीiPhone से भी ज्यादा किमती और सुन्दर तुम्हारा शरीर है ..
उसके अंगों को कपड़ों से कवर करने पर उसकी सुन्दरता और निखरेगी…
बेटी के पास पिता की इस बात का कोई जवाब नही
पति बालकनी में खड़ा खड़ा मस्ती से गा रहा था
पंछी बनू उड़ता फिरू मस्त गगन में
आज मै आजाद हु दुनिया की चमन में…
रशोई में से बीबी की आवाज आई….
“घर में ही उडो,, सामने वाली मायके गई है”
प्यार के रंगों से भरो
पिचकारी, स्नेह के रंगों से रंग
दो दुनिया सारी, ये रंग न
जाने न कोई जात न बोली,
सबको हो मुबारक ये
हैप्पी होली!!!