Jis pal aapki mrityu ho- जिस पल आपकी मृत्यु हो..

जिस पल आपकी मृत्यु हो जाती है, उसी पल से आपकी पहचान एक “बॉडी” बन जाती है।
अरे
“बॉडी” लेकर आइये,
“बॉडी” को उठाइये,
“बॉडी” को सुलाइये
ऐसे शब्दो से आपको पूकारा जाता है, वे लोग भी आपको आपके नाम से नही पुकारते ,
जिन्हे प्रभावित करने के लिये आपने अपनी पूरी जिंदगी खर्च कर दी।

इसीलिए निर्मिती” को नही
निर्माता” को  प्रभावित करने के लिये जीवन जियो।

जीवन में आने वाली हर चूनौती को स्वीकार  करें।……
अपनी पसंद की चीजों के लिये खर्चा कीजिये।……
इतना हंसिये के पेट दर्द हो जाये।….

आप कितना भी बूरा नाचते हो ,
फिर भी नाचिये।……
उस खूशी को महसूस कीजिये।……
फोटोज् के लिये पागलों वाली पोज् दीजिये।……
बिलकुल छोटे बच्चे बन जाइये ।

क्योंकि मृत्यु जिंदगी का सबसे बड़ा लॉस नहीं है।
लॉस तो वो है
के जिंदा होकर भी आपके अंदर जिंदगी जीने की आस खत्म हो चुकी है।…..

हर पल को खूशी से जीने को ही जिंदगी कहते है।
“जिंदगी है छोटी,पर” हर पल में खुश हूँ “काम में खुश हूं,”आराम में खुश हूँ ,

“आज पनीर नहीं,” दाल में ही खुश हूं,
“आज गाड़ी नहीं,” पैदल ही खुश हूं,

“दोस्तों का साथ नहीं,” अकेला ही खुश हूं,
“आज कोई नाराज है,” उसके इस अंदाज से ही खुश हूं,

“जिस को देख नहीं सकता,” उसकी आवाज से ही खुश हूं,
“जिसको पा नहीं सकता,” उसको सोच कर ही खुश हूं,

“बीता हुआ कल जा चुका है,” उसकी मीठी याद में ही खुश हूं,
“आने वाले कल का पता नहीं,” इंतजार में ही खुश हूं,

“हंसता हुआ बीत रहा है पल,” आज में ही खुश हूं,
“जिंदगी है छोटी,” हर पल में खुश हूं,

अगर दिल को छुआ, तो जवाब देना,
वरना बिना जवाब के भी खुश हूं..!!
Be Happy Always

Ek doctor shayari ke mood me-एक डॉक्टर शायरी के मूड में था

एक डॉक्टर शायरी के मूड में था,
अब देखिये उसने दवाईयां कैसे
समझाया अपने मरीज को।

दिल बहला के मोहब्बत को न धमाल करें,
सीरप को अच्छी तरह हिला के इस्तेमाल करें।

दिल मेरा टुट गया उठी जब उसकी डोली,
सुबह, दोपहर, शाम बस एक – एक गोली।

लौट आओ कि मोहब्बत का सुरूर चखे,
तमाम दवाईयां बच्चों की पहुंच से दूर रखें।

दिल मेरा इश्क करने पर रजामंद रहेगा,
इतवार के दिन अस्पताल बंद रहेगा।

Padosi mata ji aap baar baar ghar-पड़ोसी- माताजी, आप बार-बार घर के अंदर

पड़ोसी- माताजी,
आप बार-बार घर के अंदर-बाहर क्यों आ-जा रही हैं? कोई प्रॉब्लम है क्या?………

बूढ़ी औरत- नहीं बेटा, मेरी बहू टीवी देखकर योगा कर रही है।………
उसमें बाबाजी कह रहे हैं कि सास को बाहर करो…सास को अंदर करो… .

Ek baar number 9 ne 8 ko -एक बार नंबर 9 ने 8 को…

एक बार संख्या 9 ने 8 को थप्पड़ मारा 8 रोने लगा…
पूछा मुझे क्यों मारा..?

9 बोला…
मैं बड़ा हु इसीलए मारा..

सुनते ही 8 ने 7 को मारा
और 9 वाली बात दोहरा दी

7 ने 6 को..
6 ने 5 को..
5 ने 4 को..
4 ने 3 को..
3 ने 2 को..
2 ने 1 को..

अब 1 किसको मारे
1 के निचे तो 0 था !

1 ने उसे मारा नहीं
बल्कि प्यार से उठाया
और उसे अपनी बगल में
बैठा लिया

जैसे ही बैठाया…
उसकी ताक़त 10 हो गयी..!और 9 की हालत खराब हो गई।

जिन्दगीं में किसी का साथ काफी हैं,
कंधे पर किसी का हाथ काफी हैं,
दूर हो या पास…क्या फर्क पड़ता हैं,
“अनमोल रिश्तों” का तो बस
“एहसास”
ही काफी हैं !